
औघड-अघेरेश्वर वही होते है जिनमें अपार करूणा होती है,संवेदना होती है,जो अघ़ण होते हैंा किसी तरह के भेद-भाव तथा घणा से दूर रहकर औघड-अघोरेश्वर सभी के हित तथा सुख के लिए और समाज तथा राष्ट की सुव्यवस्था के लिए सतत चिंतित तथा प्रयत्न शील रहते है ा यह लोग श्वपच बन्धुओ के साथ भी रहते हैं और खाते पीते हैं ा यह आत्म मे, आत्म बुद्वि में विश्वास रखते हैंा
दोहे "कृष्ण जन्माष्टमी " (डॉ.रूप चन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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"श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई!”
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
"योगिराज श्रीकृष्णचन्द्र महाराज की जय हो!"
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फल की इच्छा मत करो, कर्म करो निष्काम।
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2 महीने पहले



7:24 am
मनोज कुमार सिह
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