
यह रात्रि ही मॉ का स्वरूप है जिसकी अधियारी में से प्रकाश के दर्शन सुलभ होते है ा मॉ रात्रि रूप हैं और सभी जीवो को अपनी गोद में लेकर सुलाती है और उन्हे नव चेतना प्रदान करती है ा निशा है ा उसके आते ही सब दीप जल उठते हैा उषा उद्यमशील बनाती है ा मनुष्य ही नही, संसार के सभी थके प्रणियो को नवचेतना निशा देती हैा
दोहे "कृष्ण जन्माष्टमी " (डॉ.रूप चन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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"श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई!”
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
"योगिराज श्रीकृष्णचन्द्र महाराज की जय हो!"
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फल की इच्छा मत करो, कर्म करो निष्काम।
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2 हफ़्ते पहले



7:32 am
मनोज कुमार सिह
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