औघड-अघेरेश्वर वही होते है जिनमें अपार करूणा होती है,संवेदना होती है,जो अघ़ण होते हैंा किसी तरह के भेद-भाव तथा घणा से दूर रहकर औघड-अघोरेश्वर सभी के हित तथा सुख के लिए और समाज तथा राष्ट की सुव्यवस्था के लिए सतत चिंतित तथा प्रयत्न शील रहते है ा यह लोग श्वपच बन्धुओ के साथ भी रहते हैं और खाते पीते हैं ा यह आत्म मे, आत्म बुद्वि में विश्वास रखते हैंा
क्षत्रप और छत्रपति: दो अलग सत्ताएँ
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शब्दकौतुक
*एक शब्द, कई रूप*
अक्सर हम एक जैसे लगने वाले शब्दों को एक ही परिवार का मान लेते हैं, खासकर जब
उनका उच्चारण मिलता-जुलता हो। 'क्षत्रप' और 'छत्रपत...
3 दिन पहले
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