औघड-अघेरेश्वर वही होते है जिनमें अपार करूणा होती है,संवेदना होती है,जो अघ़ण होते हैंा किसी तरह के भेद-भाव तथा घणा से दूर रहकर औघड-अघोरेश्वर सभी के हित तथा सुख के लिए और समाज तथा राष्ट की सुव्यवस्था के लिए सतत चिंतित तथा प्रयत्न शील रहते है ा यह लोग श्वपच बन्धुओ के साथ भी रहते हैं और खाते पीते हैं ा यह आत्म मे, आत्म बुद्वि में विश्वास रखते हैंा
आशीष त्रिपाठी का काव्य संग्रह शान्ति पर्व
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शान्ति पर्व पढ़ गया। किसी पुस्तक को पढ़ कर चुपचाप मन ही मन संवाद की आदत है।
पहली बार यह बातचीत बाहर आने को मचली।...
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7 महीने पहले
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