यह रात्रि ही मॉ का स्वरूप है जिसकी अधियारी में से प्रकाश के दर्शन सुलभ होते है ा मॉ रात्रि रूप हैं और सभी जीवो को अपनी गोद में लेकर सुलाती है और उन्हे नव चेतना प्रदान करती है ा निशा है ा उसके आते ही सब दीप जल उठते हैा उषा उद्यमशील बनाती है ा मनुष्य ही नही, संसार के सभी थके प्रणियो को नवचेतना निशा देती हैा
क्षत्रप और छत्रपति: दो अलग सत्ताएँ
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शब्दकौतुक
*एक शब्द, कई रूप*
अक्सर हम एक जैसे लगने वाले शब्दों को एक ही परिवार का मान लेते हैं, खासकर जब
उनका उच्चारण मिलता-जुलता हो। 'क्षत्रप' और 'छत्रपत...
3 दिन पहले
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