यह रात्रि ही मॉ का स्वरूप है जिसकी अधियारी में से प्रकाश के दर्शन सुलभ होते है ा मॉ रात्रि रूप हैं और सभी जीवो को अपनी गोद में लेकर सुलाती है और उन्हे नव चेतना प्रदान करती है ा निशा है ा उसके आते ही सब दीप जल उठते हैा उषा उद्यमशील बनाती है ा मनुष्य ही नही, संसार के सभी थके प्रणियो को नवचेतना निशा देती हैा
आशीष त्रिपाठी का काव्य संग्रह शान्ति पर्व
-
शान्ति पर्व पढ़ गया। किसी पुस्तक को पढ़ कर चुपचाप मन ही मन संवाद की आदत है।
पहली बार यह बातचीत बाहर आने को मचली।...
The post आशीष त्रिपाठी का काव्य संग्र...
7 महीने पहले
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें